मौन साधना अच्छा लगता है।
एक गीत
मौन साधना अच्छा लगता है।
कोलाहल के,
इस मंजर में ,
मौन साधना अच्छा लगता है ।
अब तो केवल ,
संकेतों में ,
बातें करना अच्छा लगता है ।।
हां, हम ने सबने कदम-2 पर ,
भाषा का व्यापार किया है ।
कभी मीठे, कभी कड़वे सहारे,
मतलब को साकार किया है ।।
अपनों को ठगने ,
छलने से,
दूरी रखना अच्छा लगता है ।
अब तो केवल ,
संकेतों में ,
बातें करना अच्छा लगता है ।।
जुबां चलें सब खुश हो जाएं ,
ऐसा अब तक ना हो पाया ।
इस दुनिया की अपनी रीति ,
कहीं धूप तो कहीं पर छाया ।।
ना सुनना और ,
नही सुनाना ,
पढ़ना-लिखना अच्छा लगता है ।
अब तो केवल ,
संकेतों में ,
बातें करना अच्छा लगता है ।।
मुकेश बोहरा अमन
गीतकार
बाड़मेर राजस्थान
8104123345
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