भारत माता अभिनंदन संगठन के तत्वाधान में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित
भारत माता अभिनंदन संगठन के तत्वाधान में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित
मानव जीवन पाया मेने इस जीवन पर है गर्व मुझे **मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि अशोक गोयल
भारत माता अभिनंदन संगठन की मासिक गोष्ठी ज़िला अध्यक्ष नीलम मिश्रा तरंग के सानिध्य में संपन्न हुई ।जिसकी अध्यक्षता रूप किशोर गुप्ता बहजोई संभल द्वारा की गई मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि एवम् साहित्यकार कवि अशोक गोयल रहे।
विशिष्ट अतिथि डाॅ पूनम माटिया जी दिल्ली से रहीं ।डाॅ नीलम मिश्रा तरंगने सभी का स्वागत किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री बीना गोयल द्वारा मां सरस्वती की वंदना से हुआ।कवि अशोक गोयल ने अपनी काव्य प्रस्तुति कुछ इस प्रकार दी*मानव जीवन पाया मैंने इस जीवन पर है गर्व मुझे, मैं उस जीवन का प्याला हूं जिसमें उल्लास झलकता है, मैं उस जीवन की ज्वाला हूं, जिसने संसार उबलता है, मैं उस जीवन की ज्योति प्रबल , जिसमें जनजीव पनपता है, मैं उस जीवन का राग अमल, जिसमें झंकार झनकता है। कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ कवि रूप किशोर गुप्ता जीने अपने काव्य में कहा*वक्त का पहिया कभी रुकता नहीं, हौसला अपना कभी चुकता नहीं , वीर सैनिक हिंद के हैं उनका सिर कट भले जाए मगर झुकता नहीं । विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारी कवयित्री पूनम मटिया ने पढ़ा _है बलिदानी माटी अपनी गौरवशाली है नारी पीछे नहीं तनिक भी दुर्गा काली है।नीलम मिश्रा तरंग ने अपनी काव्य प्रस्तुति में इस प्रकार कहा जमीन पर बैठकर ,मत आसमा देख ।पंखों को खोल ,अपनी उड़ान देख । कवयित्री रेखा गिरीश ने देश भक्ति से ओत प्रोत रचना को प्रस्तुत कर वावाही लूटी ।अलका गुप्ता ने यूं कहा त्यागें न कर्तव्य कल्याणकारी। विद्वान आत्मिक संस्कार धारी।अरुणा पवार ने कहा वृद्धा आश्रम में जिनके बुजुर्गों का होता है देहांत। तत्काल खुशियों पर ग्रहण का लगता सूतक काल।पूनम शर्मा ने पढ़ा जब भी मेरी कलम से कोई शब्द फूटता है पता नहीं कैसे तुम्हारा पता ढूंढ लेता है।नंदिनी रस्तोगी जी पढ़ा सीप में मोती सुरक्षित जिस तरह।मां की गोद में पाली में ।सीमा गर्ग ने पढ़ा संगीता शर्मा ने पढ़ा लोग सभी इंसान आते हैं और चले जाते हैं आते हैं बातें याद उनकी जो अधूरे मुकाम छोड़ जाते हैं।राजरानी ने कहा बेवजह उदास नहीं हूं मैं यह दर्द हर दर्द पर भारी है। खबर जमाने को ना हो सूरत सिर्फ इसलिए संभाली है।मुक्ता शर्मा ने पढ़ा कृष्ण के होठों पर जब जॉब मिल गई है बांसुरी प्रेम की मधुर सी धुन में ढल गई है ।नीलम सिंघल सुधा शर्मा कविता कुसमाकर आदि मौजूद रहे।
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